हरिद्वार, [जेएनएन]: रियो ओलंपिक में देश को कुश्ती में कांस्य पदक दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान साक्षी मलिक की नजर अब टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल पर है। उनका कहना है कि महिला पहलवानों को भी पुरुष पहलवानों की तरह सम्मान दिया जाना चाहिए, क्योंकि वह भी पुरुष पहलवानों से कम मेहनत नहीं करती। 
पद्मश्री साक्षी मलिक मंगलवार देर शाम हरिपुर कलां में अपने देवर वीर पहलवान के घर आई थी। पति सत्यव्रत और अन्य साथियों के साथ धर्मनगरी पहुंची साक्षी ने वर्ष 2020 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक के लिए की जा रही तैयारियों पर 'दैनिक जागरण' से बातचीत में कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। उत्तराखंड में भी महिलाएं काफी प्रतिभावान हैं, लेकिन अवसर की कमी के कारण आगे नहीं आ पा रही हैं। यदि सरकार चाहे तो इन प्रतिभाओं को आगे लाकर भारत को हर खेल में शीर्ष पर पहुंचा सकती हैं। 
पद्मश्री मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात
हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से पद्मश्री अवार्ड मिलने पर भारतीय पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि यह अवार्ड मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। वह चाहती हैं कि महिलाओं को सरकार की तरफ से इसी तरह सम्मान देकर उनके मनोबल को और बढ़ाना चाहिए। जब कोई देश के लिए कुछ अच्छा करता है तो सरकार को भी उसके लिए कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे उसकी मेहनत खराब न जाए। 
कांस्य पदक जीतना था ऐतिहासिक पल
रियो ओलंपिक 2016 में साक्षी मलिक ने 58 किलो भार वर्ग की फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीतकइतिहास रचा था। साक्षी ने रेपचेज के फाइनल मुकाबले में किर्गिस्तान की पहलवान एसुलू तिनिवेकोवा को मात देकर रियो ओलंपिक में भारत को पहला मेडल दिलाया था। उन्होंने इस पल को अपने लिए ऐतिहासिक बताया। 


               
   
 
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