इस्लामिक स्टेट (आईएस) की यौन दासता के चंगुल से भाग कर आईं इराक़ की दो महिला नादिया मुराद बसी और लामिया अजी-बशर को यूरोप ने शीर्ष मानवाधिकार सखारोव पुरस्कार दिया | ये दोनों महिला उन हज़ारों यज़ीदी लड़कियों में शामिल थीं जिन्हें आईएस ने यौन ग़ुलाम बनाने के लिए 2014 में अग़वा कर लिया था| लेकिन दोनों बचकर आ गईं और अब यज़ीदी समुदाय के लिए अभियान चला रही हैं | आपको बता दे की मुराद का अपहरण सिंजर के पास एक गांव कोचो से हुआ तब वो 19 साल की थीं| उसके बाद आतंकी मुराद को मोसुल ले कर गए लेकिन मुराद वहां से किसी न किसी तरीके से वहां से भागने में कामयाब हुई और वहीँ दूसरी ओर लामिया अजी-बशर को भी 16 साल की उम्र में कोचो गाँव से ही अगवा किया गया था | 20 महीने तक आतंकियों के दरिंदगी का शिकार होने के बाद भी वहां से भागने में लामिया कामयाब हो गयी |
ये पुरस्कार सोवियत वैज्ञानिक आंद्रेई सखारोव की स्मृति में हर साल दिया जाता है|इन दोनों महिलाओं को यूरोपीय संसद के उदारवादी समूह एएलडीई की ओर से नामांकित किया गया था|
