उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल शुरु में होने तय हैं. चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा नहीं की है पर सियासी समर से पहले की सुगबुगाहट तेज है. ऐसे में सूबे के उन बाहुबलियों पर भी एक नज़र डालना ज़रूरी है जो हर चुनाव में अपने रसूख या खौफ का इस्तेमाल करते हैं.
इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद ऐसा लगता है जैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में 70 से ज्यादा सीटें बाहुबलियों के प्रभाव क्षेत्र में हैं. ये पूरब में देवरिया से लेकर पश्चिम में मुजफ्फरनगर-मेरठ तक फैले हैं.
बाहुबलियों की न तो एक जात है न धर्म. आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर के इलाके में मुख्तार अंसारी का डंका बजता है तो प्रतापगढ में राजा भैया हैं. पश्चिमी यूपी डीपी यादव की कारगुजारियों के लिए जाना जाता है.
डीपी यादव पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. उनके बेटे नीतीश कटारा हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं. डीपी यादव मौसम की तरह पार्टी बदलते रहे हैं. सपा, बसपा और बीजेपी के अलावा अपनी पार्टी भी बना चुके हैं.
इलाहाबाद के आस-पास अतीक अहम आतंक का पर्याय रहे हैं और साथ में राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं. धनंजय सिंह भी एक ऐसे ही नाम हैं..